इस मंदिर में होती है भोलेनाथ केअंगूठे की पूजा, जानिए चमत्कार और मान्यताएं

इस मंदिर में होती है भोलेनाथ केअंगूठे की  पूजा, जानिए चमत्कार और मान्यताएं

चमत्कारों से भरा है यह अचलेश्वर मंदिर

Advertisement

अचलगढ़ की पहाड़ियों के पास किले के पास अचलेश्वर मंदिर में भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है। यह पहला स्थान है जहां भगवान की मूर्ति या शिवलिंग की पूजा नहीं की जाती है बल्कि उनके दाहिने पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है।

माना जाता है कि यहां के पहाड़ भगवान शिव के पैर के अंगूठे की वजह से बचे हैं। अगर शिवाजी का अंगूठा न होता तो यहां के पहाड़ नष्ट हो जाते। यहां भगवान शिव के पैर के अंगूठे से कई चमत्कार होते हैं।

पैर के अंगूठे के नीचे का गड्ढा कभी पानी से नहीं भरा जाता है

भगवान शिव के पैर के अंगूठे के नीचे प्राकृतिक रूप से एक गड्ढा बनता है। ऐसा माना जाता है कि इसमें कितना भी पानी हो, यह टिकता नहीं है। शिवाजी को चढ़ाया गया जल भी यहां नहीं दिखता, यह पानी कहां जाता है यह कोई नहीं जानता।

जब शिव ने पहाड़ को हिलने से रोका

किंवदंती है कि नंदीवर्धन ने एक बार अर्बुद पर्वत पर हलवा शुरू किया था। हिमालय में तपस्या कर रहे भगवान शिव की तपस्या में कठिनाई हुई और उसी समय भगवान शिव की नंदी भी इस पर्वत पर विराजमान थीं। नंदी को बचाने के लिए भगवान शिव हिमालय से अरबुद पर्वत पर पहुंचे। और पहाड़ को हिला दिया। यही कारण है कि भगवान शिव का यह अंगूठा इस पर्वत को उठा रहा है।

प्राचीनता का प्रतीक है विशाल चंपा का पेड़

इस मंदिर में चंपा का एक बड़ा पेड़ है।इस पेड़ को देखकर इस मंदिर की प्राचीनता का भी पता लगाया जा सकता है। मंदिर के बाईं ओर 2 कलात्मक स्तंभों पर धर्मकांत हैं। जिनकी मूर्तिकला कला भी सुन्दर और शानदार है।

Advertisement

Dhara

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *