यहां हर रोज बदलता है देवी मां का वाहन, दर्शन के लिए आने वालों की बदल जाती है किस्मत

यहां हर रोज बदलता है देवी मां का वाहन, दर्शन के लिए आने वालों की बदल जाती है किस्मत

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी कहलाती है। कहा जाता है की इस शहर में लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए जाते हैं। सपनों की नगरी कहे जाने वाले इस शहर में फिल्मी कलाकार से लेकर कई बड़े बिज़नेसमेन भी रहते हैं। इन्हीं सब के बीच इस शहर में आकर्षण का केंद्र यहां स्थित एक मंदिर भी है। जो की मुंबई शहर के इस आकर्षण और नामी शहर का आधार है। जी हां, सालों पहले मुंबई एक उजाड़ शहर माना जाता था। अपनी बसावट के शुरुआती दौर में मुंबई मछुआरों की बस्ती हुआ करती थी। इस शहर ने आज जो मुकाम हासिल किया है उसका श्रेय देवी मां के इस चमत्कारी मंदिर को जाता है।

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दरअसल हम जिस चमत्कारी मंदिर की बात कर रहे हैं वह मुंबई शहर में स्थापित मुंबा देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। मुंबा देवी का यह स्वरूप मां लक्ष्मी का ही रूप है। लोगों का मानना है की इन्हीं की कृपा के कारण मुंबई देश की आर्थिक राजधानी बन सका है। मां मुंबा देवी को मुंबई की ग्रामदेवी के रूप में पूजा जाता है। यहां हर शुभ काम से पहले मां का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया जाता है। मंदिर की स्थापना यहां के मछुआरों ने समुद्र में आने वाले तूफानों से अपनी रक्षा के लिए की थी। तब से इन्हें मुंबा देवी के नाम से जाना जाता है। इन मुंबा देवी के नाम पर ही मुंबई शहर का नामकरण हुआ।

यहां दिन के हिसाब से बदलता है देवी मां का वाहन

मां मुंबा का वाहन हर रोज बदलता है। कहते हैं दिन के हिसाब से मां मुंबा के वाहन का चयन होता है। सोमवार को मां नंदी पर सवार होती हैं तो मंगलवार को हाथी की सवारी करती हैं। बुधवार को मुर्गा तो गुरुवार को गरुड़ पर मां सवार होती हैं। शुक्रवार को सफेद हंस पर तो शनिवार को फिर से हाथी की सवारी करती हैं। वहीं रविवार को मां का वाहन सिंह होता है।

चांदी के बने हैं मां के वाहन

मां मुंबा हर दिन जिन वाहनों पर सवार होती हैं, उनका निर्माण चांदी से कराया गया है। इस मंदिर में प्रतिदिन 6 बार आरती होती है। आरती का समय अलग-अलग है। इस दौरान मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।

मंगलवार को होता है विशेष महत्व

मां मुंबादेवी के दर्शनों के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। श्रद्धालु मां से जो भी मन्नत सच्चे दिल से मांगते हैं, मां उस मन्नत को जरूर पूरा करती हैं। यहां सिक्कों को कील की सहायता से लकड़ी पर ठोककर मन्नत मांगी जाती है। हर मंगलवार को मां मुंबा के दर्शनों का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन यहां बहुत भीड़ रहती है।

ये है मंदिर से जुड़ी पैराणिक कथा

किवदंतियों के अनुसार, देवी मुंबा को ब्रह्माजी ने अपनी शक्ति से प्रकट किया था। जब स्थानीय लोग मुंबारक नाम के एक राक्षस से परेशान होकर ब्रह्मा जी से प्रार्थना की, तब उन्होंने प्रार्थना स्वीकार कर मुंबा देवी को प्रकट किया और देवी मां ने राक्षस का संहार किया। उसी के बाद मुंबई में देवी मां के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया और मुंबारक का संहार करने वाली मां का नाम मुंबा देवी रखा दिया।

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