एक गलत आदत के कारण छीन लिया गया था राम का रोल, फिर यूं बदली थी किस्मत

टीवी के सबसे पॉपुलर शो रामायण में राम  का किरदार निभाकर फेमस हुए अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी, 1958 को हुआ था। वे 63 साल के हो गए हैं। फिलहाल, वे एक्टिंग की दुनिया से दूर अपनी पर्सनल लाइफ में बिजी है। हिंदी, भोजपुरी, तेलुगु, उड़िया और बृज जैसी कई भाषाओं की फिल्में करने वाले अरुण पिछले काफी समय से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से दूर हैं। हालांकि, आज भी लोग उन्हें राम के नाम से याद करते हैं। मेरठ कॉलेज में पढ़ते हुए ही उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने की सोच ली थी। इसके बाद वह मुंबई आ गए थे। अरुण की पहली फिल्म ‘पहेली’ थी जो 1977 में आई थी।

स्‍कूल के दिनों में अरुण गोविल कई नाटकों में पार्टिसिपेट करते थे। लेकिन उन्होंने कभी एक्टर बनने का नहीं सोचा था। बात जब करियर की आई तो वे मेरठ से मुंबई अपने बिजनेसमैन भाई के साथ कुछ काम सीखने आए थे।

अरुण गोविल ने रामानंद सागर के सीरियल ‘विक्रम-बेताल’ से टीवी में डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने राजा विक्रमादित्य का रोल निभाया था। इसी के बाद उन्हें रामायण में राम का रोल मिला था। हालांकि, राम का रोल पाना अरुण के लिए बेहद मुश्किल रहा था। उन्होंने एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था।

अरुण ने बताया था कि शुरुआत में रामानंद सागर ने उन्हें राम के रोल के लिए रिजेक्ट कर दिया था, क्योंकि वह चाहते थे कि राम का किरदार करने वाला इंसान सच में किसी भी बुरी लत से दूर हो। उस वक्त अरुण सिगरेट पीते थे। इस रोल को पाने के लिए उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया था।

राम के रोल के लिए अरुण सिगरेट पीना छोड़ दिया था। उन्होंने फिर कभी भी सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाया। वे अब एक्टिंग छोड़ अरुण प्रोडक्शन कंपनी चला रहे हैं। उनके प्रोडक्शन में टीवी सीरियल ‘मशाल’ प्रोड्यूस हुआ था। साथ ही उनकी प्रोडक्शन कंपनी दूरदर्शन चैनल के लिए कार्यक्रम बनाती है।

बता दें कि अरुण गोविल राम के रोल से इतने फेमस हो गए थे कि कई बार लोग शूटिंग के दौरान उनसे आशीर्वाद लेने सेट पर ही पहुंच जाते थे। ये बात खुद उन्होंने एक इंटरव्यू में बताई थी। इतना ही नहीं, लोग टीवी पर शो शुरू होते ही फूलों की माला चढ़ाते थे। अगरबत्ती और धूपबत्ती लगाकर हाथ जोड़ बैठ जाते थे।

एक्टिंग से दूर होने पर अरुण ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें रामायण में राम का रोल करने के बाद कभी कोई अच्छा रोल ऑफर नहीं हुआ। इसका परिणाम ये हुआ कि उनका एक्टिंग करियर खत्म हो गया। उन्हें इस बात का बहुत दुख है। भले ही ‘रामायण’ को टीवी पर प्रसारित हुए लगभग तीन दशक हो गए हों लेकिन अरुण आज भी टीवी के राम के रूप में ही पहचाने जाते हैं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि अब भी कई जगह पर उन्हें देखकर लोग हाथ जोड़ने लगते हैं। अरुण का मानना है कि उन्हें राम बनकर जो सफलता मिली वो किसी दूसरे टीवी सीरियल या फिल्म से नहीं मिल पाई। अरुण आखिरी बार एक भोजपुरी फिल्म ‘बाबुल प्यारे’ में नजर आए थे ।

रिपोर्ट्स की मानें तो वे करीब 38 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी की मालिक है। वे कुछ टीवी विज्ञापनों में भी नजर आए थे। उन्होंने सावन को आने दो, राधा और गीता, जुदाई, जियो तो ऐसे जियो, कमांडर, ससुराल, लाल चुरिया, हिम्मतवाला, जस्टिस चौधरी, कालका, युद्ध, बादल, दिलवाला जैसी फिल्मों में काम किया है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Air News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara

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